लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की बेटी का आईएएस में बिना परीक्षा दिये चयन

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अब किस रास्ते पर है लोकसेवा आयोग की सर्वोच्च चयन प्रक्रिया? योग्यता के आधार पर चयन? या मनमर्ज़ी चयन? 2019 की आईएएस परीक्षा का परिणाम जब घोषित हुआ था तब 89 सीटों के परिणाम रोक कर बाकी घोषित हुए। आखिर परीक्षा के आधार पर जब इंटरव्यू हुए तब सभी पदों पर एक साथ चयन क्यों नहीं हुआ? तब आयोग द्वारा कुतर्क दिया गया था कि इसमें वंचित समाज को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। अब 89 के परिणाम आ गए हैं। वंचित समुदाय लगभग बीस प्रतिशत पर समेट दिया गया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला साहब की बेटी अंजली बिरला, बिना परीक्षा दिए, मात्र इंटरव्यू के आधार पर उन्हीं 89 पदों में से एक पर चुनी गई हैं। वह IAS बन गयी हैं। यही उनकी योग्यता है। बाकी 88 का भी विश्लेषण होना चाहिए। दिलचस्प रुझान देखने को मिलेंगे। पहले ही कुछ लोग बिना परीक्षा के IAS मनोनीत हो चुके हैं। धीरे-धीरे यही लोग लोक सेवा आयोग से लेकर सारी संस्थाओं के टॉप पर होंगे। तब क्या फैसला करेंगे? यही लोकतंत्र का स्वरूप होगा। क्या ये लोग वंचितों के हक में कोई बात करेंगे? या योग्यता की वकालत करेंगे?
आरक्षण के शुरुआती दिनों में जब वंचित समुदाय के पढ़ने की शुरुआत हुई थी, मेरिट कम आती थी तो कुछ बहुत चिल्लाते थे कि- मेरिट की अनदेखी हो रही। यही लोग जब पेड सीटें आरक्षित कर दी गईं तब मेरिट की बात नहीं किए। संस्थाओं के निजी हाथों में जाने पर चुप रहे क्योंकि निजी मेडिकल, इंजीनियरिंग कॉलेजों की आधी पेड सीटों पर वंचित समुदाय बाहर हो गया था। पैसे के बल पर कुछ सम्पन्न लोगों ने सीटें खरीद लीं। तकनीकी शिक्षा बर्बाद हो गई।
अब वंचित समुदाय के छात्रों की मेरिट ठीक-ठाक आने लगी तो बेचैनी बढ़ने लगी। कहीं- कहीं वे सामान्य से भी बेहतर करने लगे तब इंटरव्यू का खेल शुरू हुआ। योग्यता की बात करने वालों ने इंटरव्यू में वंचित समुदाय को कम नम्बर दिए जाने पर शोर नहीं मचाया। बात तो इंटरव्यू खत्म कर, मात्र लिखित परीक्षा पर परिणाम देने की होनी चाहिए थी मगर हो जो रहा है सामने है। अंजली बिरला जिस तरह आईं हैं, यही लोग अब हमारे बच्चों के भविष्य का फैसला करेंगे। पता नहीं माननीय सर्वोच्च न्यायालय को यह सब निष्पक्ष जैसा कुछ लग रहा है ? अब IAS चयन का यह रुझान नीचे तक जाएगा ही। उधर वंचित समुदाय के नेता, अपने घर की बाउंड्री ऊंची करते रहेंगे। अपनी जाति का ठेका लिए रहेंगे।

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