इंसानियत या हैवानियत :निधि विश्वकर्मा की कलम से

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खबर नेशनल टाइम्स /जुगनू गौतम
गाजियाबाद: एक्टिव ग्रीन (एनजीओ) संचालिका निधि विश्वकर्मा ने अपने लेख के द्वारा कहां की
कहते है समय सबसे बड़ा गुरु होता हैं,ये बात आज पूर्णरूपेण सिध्द होती प्रतीत होती हैं
आज अप्रत्याशित ओर विचित्र समय हैं,प्रकृति की गोद में सोये ना जाने कितने वायरस में से निकले एक छोटे से वायरस के सामने आज मनुष्य हाथ जोड़े बेबस दिखाई देता हैं
कितना मजबूर ओर ईश्वर और उसकी बनाई प्रकृति के सामने नतमस्तक ओर अपने गुनाहों की माँफी मांगता हुआ दिखाई दे रहा हैं
आज याद आती है उन निर्दोष जानवरो की हत्या,उन भरे पूरे जंगलो का कटना,गंगा और उसके जैसी कितनी ही नदियों का दम घुटना,वो सब बेजुबान है बोल नही सकते अपना दर्द पर प्रकृति सब देखती हैं और महसूस करतीं हैं,ओर अंत हर चीज का होता है
आज माँ प्रकृति उठ खड़ी हुई है इंसान को उंसकी औकात दिखाने के लिए ओर उनका ये रौद्र रूप कैसे शांत होगा ये किसी को नही पता
पर आज भी इतनी दुखद स्थिति है कि इंसान इस समय भी इंसानियत को छोड़कर हैवानियत पर उतर रहा हैं,अब भी पाप कर रहा है,लूटमार कर रहा है,कमजोरों का फायदा उठा रहा है,जींवन की जगह मृत्यु बाट रहा है,यानी इंसान अब शायद इंसान रहा ही नही हैवान हो चुका है
राक्षसों,हैवानों ने इंसानी रूप धर लिया है और हमारे ही बीच अपनी प्यास को मिटा रहे है

इस वक्त में फिर से एक मौका है माँ प्रकृति की तरफ से की आप पुण्य कमाना चाहते है या पाप
मौके हर बात के है आप क्या मौका तलाशते हो ये आप पर निर्भर करता है।
की आप इंसानी जन्म में इंसानियत अपनाते हो या हैवानियत

अगर अब भी ना रुके हम ,अब भी ना बदला खुद को तो विनाश की ओर जाते हमारे कदमों को कोई नही रोक सकता

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